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"इस भिखारी को अंदर किसने आने दिया?" शहर के सबसे महंगे मॉल में अर्जुन के फटे हुए कपड़े देखते ही सेल्सगर्ल ने उसे धक्का देकर पीछे कर दिया। " मैं भिखारी नहीं हूं। मुझे कपड़े खरीदने हैं..." "तू खुद को भी बेच देगा... तब भी यहां से एक कच्छा नहीं खरीद पाएगा।" तभी पूरे मॉल में हलचल मच गई। सबकी नजरें एक ही दिशा में उठ गईं। "अरे... ये तो शिवन्या खुराना हैं!" देखते ही देखते मॉल का पूरा स्टाफ शिवन्या के स्वागत में झुक गया। लेकिन सबको हैरान करते हुए शिवन्या सीधे अर्जुन के पास पहुंची… और अगले ही पल उसे गले लगा लिया। "सॉरी, डार्लिंग... तुम्हें मेरा इंतजार करना पड़ा।" यह नजारा देखकर पूरे मॉल में सन्नाटा छा गया। किसी को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। आखिर देश की सबसे ताकतवर बिजनेस टाइकून... इस फटेहाल लड़के को "डार्लिंग" क्यों कह रही थी? क्या था अर्जुन और शिवन्या का रिश्ता? लेकिन छह साल पहले... अर्जुन की ज़िंदगी में शिवन्या नहीं, मिशा थी। अर्जुन महर्षि ख़ानदान का वारिस था... और मिशा उसकी दुनिया। फिर एक हादसे में मिशा की जान बचाते-बचाते अर्जुन छह साल के लिए कोमा में चला गया। उसी दौरान महर्षि परिवार ने अर्जुन और उसकी माँ शालिनी को घर से निकाल दिया। बेटे को बचाने के लिए शालिनी दिन-रात मजदूरी करती रही। लेकिन छह साल बाद... हड्डियों का ढांचा बन चुका अर्जुन आख़िरकार दम तोड़ गया। तभी उस अंधेरे कमरे में एक ड्रैगन की दहाड़ गूंजी और एक दिव्य रोशनी अर्जुन के शरीर में समा गई। और अगले ही पल एक चमत्कार हो गया। अर्जुन फिर से ज़िंदा हो चुका था! शालिनी की खुशी का ठिकाना नहीं था। लेकिन होश में आते ही अर्जुन के होंठों पर पहला नाम था... "माँ... मिशा कहाँ है?" मिशा का नाम सुनते ही शालिनी का चेहरा उतर गया। उन्हें लगा था... छह साल के कोमा के बाद अर्जुन मिषा को भूल चुका होगा। लेकिन उसका प्यार अब भी ज़िंदा था। शालिनी ने बात टालने की बहुत कोशिश की, मगर अर्जुन की ज़िद के आगे उन्हें हार माननी पड़ी। आखिरकार, वह उसे मिशा के घर ले आई। पूरा घर दुल्हन की तरह सजा हुआ था। "लगता है... हम गलत वक्त पर आ गए।" शालिनी अर्जुन को वापस ले जातीं, उससे पहले ही उसका सौतेला भाई कबीर सामने आ गया। "आओ, मेरे भाई... अंदर चलो। तुम्हें तुम्हारी भाभी से मिलवाता हूं।" नरेशन: सालों बाद अपने भाई को देखकर अर्जुन खुश हो गया। लेकिन शालिनी समझ चुकी थीं... कबीर की मुस्कान के पीछे कोई साजिश छिपी है। तभी दुल्हन के जोड़े में सजी एक लड़की आई... और सीधे कबीर के गले लग गई। "अर्जुन... मिलो अपनी भाभी से। ये है... मिशा!" अर्जुन के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस लड़की से उसने बेइंतहा मोहब्बत की थी... जिसके लिए छह साल मौत और ज़िंदगी के बीच झूलता रहा... आज वही उसके सौतेले भाई की दुल्हन बनने जा रही थी। "मिशा... मैंने तुमसे सच्ची मोहब्बत की थी।" "वो सिर्फ बचपना था, अर्जुन।" "बचपना? तुम्हारी जान बचाने की कीमत मैंने छह साल के कोमा से चुकाई थी!" जवाब देने की बजाय मिशा ने पचास लाख का चेक उसकी तरफ बढ़ा दिया। "ये लो... मेरी जान बचाने की कीमत। पूरे पचास लाख। तुम्हारी औकात से कहीं ज्यादा।" अर्जुन हल्का-सा मुस्कुराया... और अगले ही पल चेक फाड़कर उसके मुंह पर फेंक दिया। "मेरे दोस्त सही कहते थे... तुम सिर्फ एक गोल्ड डिगर हो।" "मेरी मंगेतर की बेइज्जती करने की हिम्मत कैसे हुई!" अगले ही पल कबीर ने अर्जुन के सीने पर जोरदार लात मारी। कमजोर अर्जुन जमीन पर गिर पड़ा। "गार्ड्स! इन मां-बेटे को उठाकर सड़क पर फेंक दो!" "और सुन मजनू की औलाद... अगली बार अपनी औकात के हिसाब से कोई भिखारन लैला ढूंढ़ना।" पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा। आंखों में आंसू लिए अर्जुन और शालिनी चुपचाप बाहर निकल गए। "मिशा को भूल जा, बेटा।" शालिनी जानती थीं... अर्जुन ने मिशा से कितनी मोहब्बत की थी। उनकी आंखों में सिर्फ एक डर था... कहीं टूटा हुआ अर्जुन कोई गलत कदम न उठा ले। "मिशा कभी मेरी जिंदगी थी, अब मेरी जिंदगी में ही नहीं हैं। तुम घर जाओ... मैं थोड़ी देर में आता हूं।" अर्जुन अकेला सुनसान सड़क पर लड़खड़ाते हुए चल रहा था। उसके कानों में बार-बार मिशा और कबीर की बातें गूंज रही थीं। तभी... एक लग्जरी कार चीखती हुई उसके सामने आकर रुकी। कार से उतरी एक बेहद खूबसूरत लड़की... अरबपति शिवन्या खुराना। "मरने के लिए मेरी ही गाड़ी मिली थी क्या?" जवाब देने की बजाय अर्जुन अचानक उसकी तरफ लपका... और उसे अपनी बाहों में खींच लिया। शिवन्या कुछ समझ पाती.,, अगले ही पल एक गोली अर्जुन की पीठ में धंस गई। शिवन्या समझ चुकी थी... अर्जुन ने उसकी मौत अपने जिस्म पर झेल ली थी। बिना एक पल गंवाए शिवन्या अर्जुन को अपनी कार में बैठाकर अस्पताल ले गई। देखते ही देखते डॉक्टरों की पूरी टीम उसके इलाज में जुट गई। लेकिन इस बार अर्जुन की सांसें सचमुच थम चुकी थीं। उसकी आत्मा बादलों के बीच भटक रही थी। तभी बादलों को चीरता हुआ एक विशाल सुनहरा ड्रैगन उसके चारों ओर मंडराने लगा। उसकी पीठ पर सवार था... महान योद्धा और महान चिकित्सक, ड्रैगन किंग। "एक लड़की को बचाने के लिए छह साल कोमा में पड़े रहे... और अब दूसरी अनजान लड़की के लिए अपनी दूसरी जिंदगी भी दांव पर लगा दी?" अर्जुन के होश उड़ गए। "क्या... मैं फिर से मर गया?" "हां... दूसरी बार। लेकिन तुम हर बार अपनी जान क्यों दांव पर लगा देते हो?" "अगर मेरी जान देकर किसी की जिंदगी बच जाए... तो मुझे कोई पछतावा नहीं।" अर्जुन का जवाब सुनकर ड्रैगन किंग कुछ पल चुप रहा। "शायद यही बात तुम्हें बाकी इंसानों से अलग बनाती है। आज से तुम मेरे उत्तराधिकारी हो... मेरी शक्तियों और इस गोल्डन ड्रैगन के भी।" "शक्तियां...? कैसी शक्तियां?" "युद्ध कौशल, अद्भुत बुद्धि... और हर लाइलाज बीमारी का इलाज करने की शक्ति। लेकिन याद रखना अर्जुन... इसके लिए तुम्हें अपने आपको लायक बनाना होगा।" अगले ही पल ड्रैगन किंग अपने सुनहरे ड्रैगन के साथ प्रकाश में बदल गया... और बिजली की रफ्तार से अर्जुन के शरीर में समा गया। उसी पल ऑपरेशन थिएटर में पड़े अर्जुन का पूरा शरीर सुनहरी रोशनी से चमक उठा। और अगले ही पल... उसने अपनी आंखें खोल दीं। अचानक आईसीयू का दरवाजा खुला और एक नर्स चीखती हुई बाहर भागी। "डॉक्टर! चमत्कार हो गया... गोली वाला पेशेंट होश में आ गया!" अर्जुन बिना किसी सहारे के उठकर खड़ा हो गया। उसे देखकर डॉक्टर और शिवन्या दोनों अवाक रह गए। "तुम... तुम ठीक हो?" "मेरे कपड़े कहां हैं? मुझे घर जाना है... ।" शिवन्या ने अपनी असिस्टेंट से अर्जुन के लिए नए कपड़े मंगवाए। अर्जुन कपड़े बदल रहा था, अर्जुन को बॉडी पर शिवन्या की आंखें ठहर गईं। थोड़ी देर तक कमजोर दिखने वाला अर्जुन... आज चौड़े कंधों और उभरे हुए सिक्स पैक्स के साथ बिल्कुल अलग नजर आ रहा था। "ये... इतना बदल कैसे गया?" अर्जुन बिना कुछ कहे वहां से जाने लगा। तभी शिवन्या उसके पीछे दौड़ी और एहसान चुकाने के लिए पचास लाख का चेक उसकी तरफ बढ़ा दिया। चेक देखते ही अर्जुन की आंखों के सामने मिशा का फेंका हुआ चेक घूम गया। "तुम अमीर लोग खुद को समझते क्या हो? पैसा है, तो हर इंसान की कीमत लगा दोगे? हर आदमी बिकाऊ नहीं होता, मैडम!" अर्जुन ने गुस्से में चेक फाड़कर जमीन पर फेंक दिया। शिवन्या एक पल के लिए स्तब्ध रह गई। "मेरा वो मतलब नहीं था... मैं सिर्फ तुम्हारी मदद करना चाहती थी।" अर्जुन बिना जवाब दिए आगे बढ़ गया। शिवन्या भी अपनी कार लेकर उसके पीछे आ गई। "बैठो... मैं तुम्हें घर छोड़ देती हूं।" अर्जुन जल्द से जल्द अपनी मां के पास पहुंचना चाहता था। इसलिए बिना कुछ कहे कार में बैठ गया। कुछ देर बाद कार एक झोपड़पट्टी के सामने रुकी। सामने टूटी-फूटी झोपड़ी देखकर शिवन्या हैरान रह गई। "ये... ऐसी गरीबी में रहता है? फिर भी इसने पचास लाख का चेक बिना सोचे फाड़ दिया!" "तुम्हारी जान अभी भी खतरे में है। अपना ख्याल रखना... और हां, मेरे लायक कोई नौकरी हो तो बताना।" अर्जुन की यही बात शिवन्या के दिमाग में घर कर गई। उसे लगा, शायद यही लड़का उसकी सबसे बड़ी समस्या का हल बन सकता है। उसी वक्त उसकी कार में फोन बज उठा। दूसरी तरफ उसके दादाजी थे। "शिवन्या! तुम हो कहाँ? आज की फैमिली मीटिंग कितनी ज़रूरी थी, ये अच्छी तरह जानती हो।" "दादाजी... मैं एक ज़रूरी काम में फँस गई थी। घर पहुँचकर सब बताती हूँ।" उसने जैसे-तैसे बात खत्म की। लेकिन कॉल कटते ही फोन फिर बज उठा। इस बार उसकी माँ थीं। "शिवन्या, तुम कहाँ हो? आज मीटिंग में तुम्हारी शादी का फैसला हो गया। तुम्हारे दादाजी ने तय कर दिया है... तुम्हारी शादी साहनी फैमिली के बेटे से ही होगी।" शिवन्या की आंखें भर आईं। उसने गुस्से से कहा, "मैं ये शादी कभी नहीं करूंगी।" फोन कटते ही उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े। मिनिस्टर साहनी के पोते नरेंद्र के अय्याशी के किस्से शिवण्या ने सुन रखे थे, लेकिन उसके परिवार को उसकी खुशी नहीं... सिर्फ़ करोड़ों का बिज़नेस दिखाई दे रहा था। ऊपर से आज किसी ने उसकी जान लेने की भी कोशिश की थी। अगर अर्जुन बीच में नहीं आता... तो शायद आज वह ज़िंदा भी नहीं होती। ऑफिस पहुँचते ही शिवन्या ने अपनी असिस्टेंट युक्ति को बुलाया। "मुझे कल सुबह तक उस लड़के की पूरी जानकारी चाहिए... उधर, जैसे ही अर्जुन घर पहुँचा, उसे देखते ही शालिनी ने राहत की साँस ली। "बेटा... तू ठीक तो है ना? और ये नए कपड़े...?" "पुराने कपड़े कीचड़ में खराब हो गए थे... जिसने खराब किए, उसी ने नए दिला दिए।" नरेशन: इतना कहकर उसने बात वहीं खत्म कर दी। "माँ... मैं बहुत थक गया हूँ। थोड़ा आराम करना चाहता हूँ।" असल में अर्जुन को थकान नहीं थी। वह अपनी माँ की आँखों का सामना नहीं कर पा रहा था। बार-बार वही मंज़र उसकी आँखों के सामने घूम रहा था... जब सबके सामने उसकी माँ का अपमान हुआ था। बिस्तर पर लेटते ही उसने मुट्ठियाँ भींच लीं। "माँ... तुम्हारे हर आँसू का हिसाब होगा। ये मेरा वादा है।" तभी अर्जुन को बादलों में मिला वह रहस्यमयी योद्धा याद आया। उसने तुरंत अपनी शर्ट उतारी और आईने के सामने जाकर खड़ा हो गया। आईने में खुद को देखते ही उसकी आँखें फैल गईं। आज सुबह ही कमजोर और बीमार दिखने वाला उसका शरीर अब गठीली मांसपेशियों और गजब की ताकत से भरा हुआ था। "ये... ये कैसे हो सकता है? क्या मैं सच में ड्रैगन किंग बन गया हूँ?" तभी अर्जुन की आँखों के सामने सब कुछ धुंधला पड़ने लगा, अर्जुन की चेतना मानो किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गई। पूरा आसमान उड़ते हुए धुरंधर योद्धाओं से भरा था। जमीन पर हजारों लाशें बिछी थीं। उन लाशों के बीच एक घायल नौजवान योद्धा अकेला खड़ा था। "मानना पड़ेगा, लड़के... तुमने वो हासिल कर लिया, जिसके लिए लोग हजारों साल से तड़प रहे थे।" नौजवान ने खून थूककर उसकी तरफ देखा। "जिस चीज के लिए तुम यहां आए हो... वो तुम्हें कभी नहीं मिलेगी।" "तेरी जिद ही तुझे ले डूबेगी। तू भी मरेगा... और तेरा ड्रैगन भी।" "ड्रैगन किंग को मारने की औकात... तुममें से किसी की नहीं।" अगले ही पल ड्रैगन किंग के शरीर से खून जैसी लाल आभा फूट पड़ी। देखते ही देखते पूरा आसमान उसी लाल रोशनी में डूब गया। सभी योद्धाओं के चेहरों पर डर साफ नजर आने लगा। "नहीं... ये सचमुच ड्रैगन की हड्डी नष्ट करने जा रहा है!" तभी एक लड़की हवा को चीरती हुई सीधे ड्रैगन किंग के सामने आकर रुकी। उसे देखते ही ड्रैगन किंग की आंखों की लाल चमक पलभर में शांत हो गई। "अब मैं आ गई हूं... सब ठीक हो जाएगा।" लेकिन अगले ही पल... उस लड़की ने पूरी ताकत से अपनी तलवार ड्रैगन किंग के सीने में उतार दी। देखते ही देखते पूरा युद्धक्षेत्र सन्नाटे में डूब गया। कुछ देर बाद... अर्जुन ने धीरे-धीरे आंखें खोलीं। "वो... वही योद्धा था, जो मुझे बादलों में मिला था। आखिर मेरे साथ हो क्या रहा है?" इन सवालों का जवाब उसके पास नहीं था। लेकिन एक बात साफ थी... उसकी ज़िंदगी पूरी तरह बदल चुकी थी। अगली सुबह अर्जुन तैयार होकर नौकरी की तलाश में निकल पड़ा। उधर, खुराना ग्रुप के आलीशान ऑफिस में शिवन्या अपनी कुर्सी पर बैठी थी। तभी उसकी असिस्टेंट युक्ति एक फाइल लेकर अंदर आई। "मैडम, इस लड़के की पूरी रिपोर्ट।" रिपोर्ट पढ़ते-पढ़ते शिवन्या की नजर एक जगह ठहर गई। "छह साल कोमा में रहने के बाद भी... उसने अपनी जान की परवाह किए बिना मेरी जान बचाई?" तभी उसका फोन बजा। कॉल उठाते ही दूसरी तरफ की बात सुनकर उसके चेहरे का रंग उड़ गया। अगले ही पल... उसने गुस्से में फोन जमीन पर दे मारा। "नहीं... मैं उस नरेंद्र से कभी शादी नहीं करूंगी!" तभी युक्ति के चेहरे पर हल्की मुस्कान उभर आई। "मैडम... मेरे पास एक प्लान है।" युक्ति ने धीरे-धीरे अपनी पूरी योजना समझाई। उसकी बात खत्म होते-होते शिवन्या के चेहरे पर भी मुस्कान लौट आई। "प्लान तो अच्छा है... लेकिन अगर सब कुछ हमारे हिसाब से नहीं हुआ तो?" "मैडम... कोशिश तो करनी ही होगी। वैसे भी, हमारे पास दूसरा रास्ता है क्या?" आखिर ऐसा क्या प्लान था, जिसने पल भर में शिवन्या की सारी परेशानी दूर कर दी? उधर अर्जुन पूरा दिन नौकरी की तलाश में भटकता रहा, लेकिन उसे कहीं काम नहीं मिला। थका हारा अर्जुन शाम को जब घर पहुंचा, तो गली के बाहर खड़ी लग्जरी गाड़ियों और बॉडीगार्ड्स की लंबी कतार देखकर ठिठक गया। अंदर पहुंचते ही उसकी नजर शिवन्या पर पड़ी। "तुम... यहां?" "मेरे पास तुम्हारे लिए एक ऑफर है।" "कैसा ऑफर?" "क्या तुम मुझसे कॉन्ट्रैक्ट मैरिज करोगे... बिना सुहागरात वाली शादी?" अर्जुन की आंखें हैरानी से फैल गईं। अर्जुन (चौंककर): "क्या...? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है?" "तुम्हें नौकरी चाहिए... और मुझे एक किराए का पति। बदले में हर महीने एक करोड़ रुपये और रहने के लिए एक आलीशान विला मिलेगा।" "मदद चाहिए, तो मदद मांगो। मदद खरीदी नहीं जाती... मिस अरबपति।" "गलत मत समझो, अर्जुन। मेरे आसपास हर कोई नकाब पहनकर घूम रहा है। समझ नहीं आता कौन अपना है, कौन दुश्मन। मुझे किसी ऐसे इंसान की जरूरत है, जिस पर आंख बंद करके भरोसा कर सकूं।" अर्जुन को शिवण्या की आँखों में सच्चाई दिखी। तभी उसे अपनी मां का चेहरा याद आया... पिछले छह सालों में उन्होंने सिर्फ तकलीफें ही देखी थीं। "ठीक है, शिवन्या। मैं तुम्हारा पति बनूंगा... और आज से तुम्हारी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी मेरी होगी।" शिवन्या का दिल एक पल के लिए धड़क उठा। पता नहीं क्यों, उसे अर्जुन पर खुद से भी ज्यादा भरोसा होने लगा था। वह हल्की मुस्कान के साथ अपनी गाड़ी की ओर बढ़ गई। "अर्जुन... आज से तुम्हारे दुश्मन, मेरे दुश्मन हैं।" उधर अर्जुन भी मन ही मन एक फैसला कर चुका था। कल तक शिवन्या उसके लिए एक अजनबी थी, लेकिन अब वह उसकी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। "जो भी शिवन्या तक पहुंचना चाहता है... पहले उसे मेरा सामना करना होगा।" दूसरे दिन अर्जुन घर से निकला और कुछ देर बाद कोर्ट पहुंच गया। शिवन्या पहले से उसका इंतजार कर रही थी। शिवन्या ने अर्जुन का हाथ पकड़ा और उसे सीधे कोर्ट के अंदर ले गई। कुछ ही देर में दोनों ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए... और अगले ही पल उनके हाथ में मैरिज सर्टिफिकेट था। "वैसे... रात को जल्दी सोना मत। आखिर आज हमारी सुहागरात है।" "ओए... भूल गए क्या? हमारी बिना सुहागरात वाली शादी हुई है। मेरी मर्जी के बिना मुझे छूने की कोशिश भी मत करना।" "अच्छा... तो मतलब तुम्हारी मर्जी से छू सकता हूं?" शिवन्या एक पल के लिए निरुत्तर रह गई। उसके जवाब देने से पहले ही अर्जुन मुस्कुराता हुआ वहां से निकल गया। "मैडम... जब आपका डाइवोर्स हो जाए, तो मुझे बता दीजिएगा। मैं इससे शादी कर लूंगी।" "अगर मेरे पति पर नजर डाली... तो आंखें निकाल लूंगी तेरी।" युक्ति मुस्कुरा उठी। उसे पहले ही समझ आ गया था कि ये कॉन्ट्रैक्ट मैरिज ज्यादा दिन कॉन्ट्रैक्ट नहीं रहने वाली। कुछ ही देर में, शिवन्या अपने दादाजी जयदेव के सामने खड़ी थी। "तुम्हारी शादी नरेंद्र से ही होगी!" "दादाजी... मैंने अर्जुन नाम के लड़के से कोर्ट मैरिज कर ली है।" यह सुनते ही जयदेव का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। "मेरी इजाजत के बिना शादी करने की हिम्मत कैसे हुई? कौन है वो लड़का?" "आज शाम की पार्टी में... आप उससे मिल लेंगे।" जयदेव ने उसी पल तय कर लिया कि वह अर्जुन को उसकी औकात याद दिलाकर रहेंगे। उधर, शिवन्या चाहती थी कि पार्टी में अर्जुन सबका दिल जीत ले। इसलिए वह उसे एक बड़े शॉपिंग मॉल ले गई। शिवण्या गाड़ी पार्क करके आ रही थी की अर्जुन के पुराने कपड़े देखकर वहां मौजूद सेल्सगर्ल्स उसे भिखारी समझ बैठी। "इस भिखारी को अंदर किसने आने दिया?" " मैं भिखारी नहीं हूं। मुझे कपड़े खरीदने हैं..." "तू खुद को भी बेच देगा... तब भी यहां से एक कच्छा नहीं खरीद पाएगा।" तभी पूरे मॉल में हलचल मच गई। सबकी नजरें एक ही दिशा में उठ गईं। "अरे... ये तो शिवन्या खुराना हैं!" देखते ही देखते मॉल का पूरा स्टाफ शिवन्या के स्वागत में झुक गया। लेकिन सबको हैरान करते हुए शिवन्या सीधे अर्जुन के पास पहुंची… और अगले ही पल उसे गले लगा लिया। "सॉरी, डार्लिंग... तुम्हें मेरा इंतजार करना पड़ा।" वहाँ मौजूद सभी लोग एक अरबपति लड़की को भिखारी जैसे दिखने वाले लड़के के साथ खड़ा देख हैरान थे। "आजकल खूबसूरत लड़कियों को भी भिखारी लड़के पसंद आने लगे हैं।" शिवन्या ने अर्जुन के लिए एक सूट चुना। जैसे ही अर्जुन ने अपनी पुरानी शर्ट उतारी, उसके गठीले सिक्स पैक पर वहां मौजूद हर लड़की की नजर ठहर गई। "अब समझ आया... असली सरप्राइज़ तो शर्ट के अंदर था!" वह तुरंत इंच टेप लेकर अर्जुन के पास पहुंच गई। "सर... पहले आपकी शर्ट की साइज ले लेती हूं।" साइज लेने के बहाने सेल्सगर्ल बार-बार अर्जुन के गठीले शरीर को छूने लगी। यह देखकर शिवन्या का चेहरा तमतमा उठा। "बस... टेप मुझे दो। मैं खुद नाप लूंगी।" सेल्सगर्ल मजबूरी में पीछे हट गई। शिवन्या का यह पजेसिव अंदाज देखकर अर्जुन के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई। कुछ ही देर बाद अर्जुन ब्लैक सूट पहनकर बाहर निकला। उसे देखते ही ऐसा लगा, मानो कोई फिल्मी सुपरस्टार सामने आ खड़ा हुआ हो। उसका रौब ऐसा था कि अब उसके सामने शिवण्या की खूबसूरती भी फीकी पड़ गई। दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे बाहर निकलने लगे। कबीर... क्या ये अर्जुन है? मिषा की नज़र अर्जुन पर टिक गई। कबीर ने भी अर्जुन को ऊपर से नीचे तक देखा। महंगा सूट... रॉयल अंदाज़... और उसके साथ खड़ी बेमिसाल खूबसूरत शिवण्या। लेकिन अगले ही पल उसके चेहरे पर तिरस्कार भरी हँसी आ गई। नहीं मिषा! वो भिखारी तो किसी गटर में सड़ रहा होगा। ऐसे हाई क्लास मॉल में आने की उसकी औकात ही नहीं है। नहीं... वो अर्जुन ही है। मैं अभी सच पता लगाती हूँ। मिषा तेज़ी से अर्जुन की तरफ बढ़ी। वह जानबूझकर उसे टक्कर मारने ही वाली थी कि अर्जुन एक कदम पीछे हट गया। अगले ही पल मिषा अपना संतुलन खो बैठी और धड़ाम से फर्श पर गिर पड़ी। एक पल के लिए अर्जुन का दिल ज़ोर से धड़क उठा। कभी यही लड़की उसकी दुनिया हुआ करती थी। लेकिन अगले ही पल उसे अपनी माँ का अपमान याद आ गया... और उसकी आँखों की नरमी पलभर में गायब हो गई। अरे... ये औरत गिर कैसे गई? क्योंकि ये पहले से ही गिरी हुई औरत है। अर्जुन की बात शिवण्या के सिर के ऊपर से निकल गई। लेकिन मिषा अच्छी तरह समझ गई... अर्जुन ने उसे सबके सामने गिरी हुई औरत कहा था। कबीर! क्या तुम बस तमाशा देखते रहोगे? मिषा को इंप्रेस करने के चक्कर में कबीर ने अपनी ज़िंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दी। गार्ड्स! इस लड़के की एक-एक हड्डी तोड़ दो! आदेश मिलते ही दसों गार्ड अर्जुन की ओर बढ़े। अर्जुन भी मुकाबले के लिए तैयार हो गया। लेकिन पहला मुक्का उस तक पहुँचता, उससे पहले ही किसी ने उसे हवा में रोक लिया। अर्जुन ने मुड़कर देखा... शिवण्या ने सिर्फ़ एक हाथ से उस हट्टे-कट्टे गार्ड की कलाई जकड़ रखी थी। अगले ही पल उसकी ज़ोरदार किक सीधे गार्ड के चेहरे पर पड़ी। गार्ड हवा में उछलता हुआ कई कदम दूर जा गिरा। ये नज़ारा देखकर अर्जुन ही नहीं, बाकी गार्ड्स भी दंग रह गए। अरे... ये फुलझड़ी नहीं, पूरा धमाका है! शिवण्या ने मुस्कुराकर अर्जुन को आँख मारी... फिर बिजली की रफ्तार से बाकी गार्ड्स पर टूट पड़ी। अर्जुन बस मुस्कुराते हुए उसका जलवा देखता रह गया। अब इसे तो मैं बिल्कुल नहीं छोड़ूँगा! मिषा ने पास पड़ा लोहे का रॉड उठाकर कबीर के हाथ में थमा दिया। कबीर चुपके से पीछे से आकर शिवण्या पर वार करने ही वाला था कि तभी... अर्जुन ने उसका हाथ हवा में ही पकड़ लिया। क्या बात है, कबीर भैया... और मिषा भाभी! धोखे से वार करने की आदत अभी तक नहीं गई? अर्जुन की आवाज़ सुनते ही कबीर और मिषा के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अब उन्हें यकीन हो चुका था... उनके सामने कोई अर्जुन जैसा दिखने वाला नहीं, बल्कि असली अर्जुन ही खड़ा था। उसी वक्त मॉल के बाहर एक के बाद एक कई ब्लैक एसयूवी आकर रुकीं। अगले ही पल दर्जनों गार्ड बाहर निकले और देखते ही देखते उन्होंने कबीर और मिषा को चारों तरफ से घेर लिया। मिषा की नज़रें अब भी अर्जुन पर टिकी थीं। अर्जुन... तुमने खुद को इतना कैसे बदल लिया? मैंने खुद को जो बदला है... यही मेरा बदला है। तभी सभी गार्ड एक साथ शिवण्या को सलूट किया। अगले ही पल एक गार्ड आगे बढ़ा और कबीर के गाल पर ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दिया। तुम्हारी इतनी हिम्मत... कि तुमने शिवण्या खुराना पर हाथ उठाने की कोशिश की? ये कबीर और मिषा के लिए एक और बड़ा झटका था। अर्जुन के साथ खड़ी लड़की कोई आम लड़की नहीं... बल्कि देश की सबसे मशहूर बिज़नेस टाइकून, शिवण्या खुराना थी। मैडम... हमें माफ़ कर दीजिए! अर्जुन... तू तो मेरा भाई है, मुझे माफ़ कर दे! लेकिन शिवण्या और अर्जुन ने उनकी तरफ एक बार भी पलटकर नहीं देखा। दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे आगे बढ़ गए। देखा! मैं कोई गुड़िया नहीं... क्वीन हूँ। और जब क्वीन के साथ ड्रैगन किंग हो... फिर तो तबाही पक्की है। तभी अर्जुन अचानक की आँखों में सुनहरी चमक दौड़ने लगी। ऊपर एक विशाल सुनहरा ड्रैगन आसमान में मंडराने लगा। सालों का इंतज़ार खत्म हो चुका था... क्योंकि ड्रैगन का ‘किंग’ लौट आया था! अब क्या होगा आगे? एक सौदे से हुई ये शादी... क्या प्यार में बदल जाएगी? आखिर शिवण्या की जान का दुश्मन कौन है? क्या अर्जुन उसे बचा पाएगा? क्या अर्जुन ड्रैगन किंग की दिव्य शक्तियों के लायक साबित हो पाएगा? जानने के लिए अभी इंस्टॉल बटन पर क्लिक करके डाउनलोड करें Pocket FM और सुनिए सस्पेंस से भरपूर एक अनोखे योद्धा की कहानी - **King of Dragon! ** और हाँ… दसवे एपिसोड के बाद का दिमाग हिला देने वाला सस्पेंस मिस मत करना ।
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