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ज्योतिषाचार्य और पिशाचिनी 1 तुम्हें पता है जब मैंने उसे देखा तो मुझे लगा जैसे मैं फिर से जीने लगा हूँ! महानंद चट्टोपाध्याय ने अपने दिल की बात कही लेकिन क्या यह सच में एक नई शुरुआत थी या एक खतरनाक खेल? महानंद चट्टोपाध्याय एक लापरवाह युवक जिसने अपने पिता के ज्योतिष ज्ञान को कभी गंभीरता से नहीं लिया अब अचानक अपने जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर खड़ा था। उसकी माँ की मृत्यु ने उसे जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा दिया था। कादिर उसका चमचा अब उसकी सम्पत्ति का मालिक बन चुका था। महानंद ने सोचा था कि वह अपनी मस्ती में जी सकता है लेकिन अब उसे अपने अस्तित्व के लिए लड़ना था। एक दिन जब वह नदी के किनारे बेहोश पड़ा था तब एक डोम ने उसकी मदद की। तू क्या कर रहा है महानंद? डोम ने उसे उठाते हुए कहा। तू तो ज्योतिषी बनने वाला था अब क्या करेगा? महानंद ने अपने पिता की मृत्यु के बाद अपनी माँ के लाड़ प्यार में जीते हुए जीवन बिताया। तू तो बस मस्ती कर रहा है बेटा! उसकी माँ हमेशा उसे समझाती। लेकिन जब माँ चली गई तो सब कुछ बदल गया। कादिर ने उसे नशा मुक्ति केंद्र में डाल दिया और जब वह वहां से भागा तो सब कुछ खो चुका था। कादिर तूने मेरी सम्पत्ति चुरा ली! उसने चिल्लाया लेकिन कादिर ने उसे नदी में फेंक दिया। तू अब कुछ नहीं कर सकता महानंद! महानंद ने अपने जीवन को फिर से संवारने का निर्णय लिया। मैं ज्योतिषी बनूँगा! उसने सोचा। लेकिन जब वह लोगों के सामने गया तो सबने उसे पोंगा पंडित कहकर बुलाया। तू तो कुछ नहीं जानता! लोग हंसते थे। महानंद ने अपने पिता का नाम खराब होते हुए देखा और उसे गहरा दुख हुआ। क्या मैं सच में अपने पिता का नाम रोशन
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पिशाचिनी ने एक दिन मुझे अपना अलग से कमरा लेने के लिए कहा । यह एक स्वाभाविक बात थी क्योंकि डोम के झोपड़े में वह स्वतं.....
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