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सूरत शहर की सुबह में एक सुनहरी तपिश थी, जो वहां के एक आलीशान बंगले के लॉन में बैठे युवा शख्स के खुले बदन को चमका रही थी। उस शख्स ने घुटनों के बल बैठे बस पुराना सूती पायजामा पहना था। उसके हाथ कोहनियों तक और पैर घुटनों तक पूरी तरह कीचड़ में सने थे। चेहरे पर भी मिट्टी की ऐसी परतें जमी थीं कि उसकी तीखी नाक और गहरी आँखों के अलावा कुछ भी पहचान पाना नामुमकिन था। वह बड़ी तल्लीनता से जमीन खोद रहा था, जैसे दुनिया की सारी फिक्र उसी मिट्टी में दफन कर देना चाहता था। उसके पास पेड़ पर बैठे पंछी चहचहा रहे थे, सुबह की इस शांति में उनकी आवाज़ मधुर लोरी सुकून दे रही थी। लेकिन तभी, इस रूहानी शांति में खंजर घोंप गया। धुम्म-धुम्म-धुम्म... कान फोड़ देने वाले हॉर्न के साथ एक नीली ओपन-जीप झटके से गेट पर रुकी और म्यूजिक सिस्टम से तेज हरियाणवी पॉप का शोर फूट पड़ा, जिसने परिंदों को डराकर उड़ा दिया। "व्हाट द हेल..." मिट्टी खोद रहे शख्स का हाथ वहीं रुक गया। म्यूजिक बंद हुआ, लेकिन शोर नहीं। एक लड़का, जिसकी उम्र मुश्किल से 21-22 साल रही होगी, वो फिल्मी हीरो की तरह उछलकर जीप से बाहर कूदा। उसके बाल बिखरे हुए थे, जैसे उसने हफ़्तों से कंघी न की हो। उसने एक ढीली-ढाली सफ़ेद टी-शर्ट और फटी हुई नीली जींस पहनी थी। उसके गले में हेडफोन लटके थे और चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान थी जो शायद मुर्दे में भी जान फूंक दे। वह था विवान। उसने हाथ ऊपर उठाए और गहरी सांस ली, "आह! नया शहर, नया घर और नई शुरुआत! थैंक यू गॉड!" तभी उसकी नज़र उस मिट्टी खोद रहे शख्स पर पड़ी। वो उसकी ओर पीठ लिए बैठा था। विवान आगे आते हुए ऊंची आवाज में चिल्लाया, "माली काका! ओ काका... सुनिए तो..." उस शख्स का हाथ मिट्टी के अंदर ही जम गया। माली काका? उसने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी गहरी भूरी आँखों में गुस्सा सुलग उठा। "तुझे ही बोल रहा हूं ओ कीचड़-मैन! बहरे हो क्या?" विवान ने मटकते हुए उसके करीब आकर अपनी नाक सिकोड़ी, "अरे बाप रे! इतनी गंदगी! तुझे देखकर तो मुझे ही खुजली हो रही है। चल जल्दी बोल, मेरा ये भारी गिटार केस और बैग अंदर ले जाने का कितना लेगा? और सुन, पानी भी लेकर आना, गला सूख गया है मेरा।" सामने रहा वह शख्स धीरे-धीरे खड़ा हुआ। वह विवान से कम से कम आधा सिर ज्यादा लंबा था, और मिट्टी में सने होने के बावजूद उसके शरीर से एक जबरदस्त डोमिनेटिंग वाइब निकल रही थी। उसने एक ठंडी, जलती हुई नजर विवान पर डाली तो विवान ने बेपरवाही से हंसते हुए बोला, "अरे! घूर क्या रहा है? शक्ल देखी है अपनी? जरा सलीके से रहा कर भाई, तेरे चेहरे पर तो जैसे किसी ने कोयले की पेंटिंग कर दी है वैसा बना हुआ है। जा, पहले मेरा बैग उठा और अंदर रख कर आ, फिर तुझे बढ़िया टिप भी दूंगा।"
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सूरत शहर की सुबह में एक सुनहरी तपिश थी, जो वहां के एक आलीशान बंगले के लॉन में बैठे युवा शख्स के खुले बदन को चमका रही थ.....
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